तेरी जुल्फां की छाँह म्ह Poem by Manish Shokeen

तेरी जुल्फां की छाँह म्ह

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तेरी जुल्फां की छाँह म्ह

मनै कितणे मौसम हारे सैं,

नदी, नाळे, झील, समंदर सब

बस तेरी बातां के मारे सैं,

यैं लब तेरे फूल, कदे जुगनूं

कदे चाँद, तो कदे तारे सैं,

अम्बर, बिजळी, बादळ, घटा

सब तेरी आँख्यां के इशारे सैं ।

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Manish Shokeen

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Najafgarh
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