शरद पूर्णिमा Poem by Pushpa P.

शरद पूर्णिमा

दोस्तों शरद पूर्णिमा अब आने को है चलिए हम भी कान्हाऔर गोपियोंके प्रेम nritya की एकझांकी अपने मन की काल्पनिक दुनिआ में जीवंत करलें


शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा पृथ्वी के बहुत करीब होता है ऐसा माना जाता है कि इसी दिन कृष्ण भगवान ने गोपियो संग रास रचाया थाऔर हरेक गोपी के साथ-साथ एक-एक कान्हा था। सबको लग रहा था कि कान्हा unke ही साथ है और गोपी-कृष्ण का प्रेम रस वसुंधरा पर मानो बरस उठा था...

इस तरह शरद पूनम कई कारणों के साथ ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाती है। कहा जाता है कि शरद पूर्णिमा ki, रात को खीर बनाकर चांदनी के प्रकाश में रखा जाता है। इस खीर का का सेवन करने से कई बीमारियां ठीक होती हैं और इसी दिन से (शरद पूनम से) शीत ऋतु का प्रारंभ होता है। प्रस्तुत है प्रसंगवश कविता: _____

उजियारी शरद पूनम की रात में सखी ने कान्हा से मुलाकात कर ल
साहिल से टकराते दरिया की लहरों ने बात कर ली
मानो जीवन की रवानी ने जिंदगी से मुलाकात कर ली, सूरज के उजालों से दिन ने रोशनी से मुलाकात कर ली

सावन की झड़ी ने पुरवैया से प्रीत कर ली
प्यार की बहती ठंडी फुहार ने मन में खुशियां भर दी
झूमे सारा जहां अब तो खुशियों की कलियां खिल गई उजियारी शरद पूनम की रात में सखी ने कान्हा से मुलाकात कर ली

मिले सजन अब तो बहारों की बहारें मिल गई
नैना बाट जोहे जिनकी हर पल अब तो
वह प्यार की बरसातमिल गई

हर पल मन करे सखी देखूं तस्वीर उनकी
देख तस्वीर उसके मन की उमंगें मचल गई

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