pushpa p. parjiea

Comments about pushpa p. parjiea

  • Pushpa P Parjiea Pushpa P Parjiea (3/14/2017 6:46:00 AM)

    thanks alott rajnish ji for apriceation & very nice comments.
    sorry for late reply

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  • Rajnish Manga Rajnish Manga (4/15/2016 10:29:00 PM)

    We welcome you on this Forum, Pushpa ji. I have seen a couple of your poems and find that they are quite promising. There is a lot of variety but freshness of expression is the mainstay of your poetry. I wish you all the best.

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Best Poem of pushpa p. parjiea

दिले नादां (Dile Nadan)

तकते रहे राहें हम उम्र के हर मोड़ पर
उम्मीद का छोड़ा न दामन क़यामत की दस्तक होने तक
मुस्कान सजाये होठों पर हम जीते गए अंतिम आह तक
सोचा कभी मिल जाय शायद कहीं खुशियों का आशियाँ हमें भी
पर थे नादान हम कि न समझ सके बेवफा ज़माने के सितम आज तक
अंतिम मोड़ पर पता चला कोई नहीं अपना यहाँ
हम तो इक मेहमान थे सबके लिए बस आज तक
कितने नादाँ थे न समझ सके अपनों की फ़ितरत को
कितने नादाँ थे न समझ सके बेगानों की मतलब परस्ती को
हर पल का मुस्कुराना पड़ गया भारी यहाँ
सबने भुला दिया ये कहकर कि हम तो अकेले में भी मुस्कुरा लेते हैं
दर्दे दिल की दास्ताँ न सुना ए दिल! किसी को...

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रहोगी अनमोल सदा‏

मां तेरी ममतामयी अंखियां याद आती हैं
आते ही तेरी याद, असुंवन जल वर्षा बरसाती है
तेरी स्नेह सरिता ने समझाया जीवन राग मुझे
दुनिया की हर जंग को जितना सिखाया तूने मुझे
जब-जब हारी हिम्मत तुझको बस याद किया मैंने
लगा मानो सहलाया मुझे तूने और आगे बढ़ा दिया तूने