वो धुंधली यादें
हां वो धुंधली यादें
ले चली मुझे उन गलियां
जहां चहकती थीं मेरी किलकारियां।।
हां वो धुंधली यादें
जिसमे बस्ते थे
मेरे अब्बा न्यारे
चांद सितारे बुनते, मेरे वास्ते।।
ले चली मुझे उन गलियों में
जहां बस्ते हैं सपने मेरे
जिन्हें हाव देते अब्बा मेरे
की कभी सच हो जायेंगे ये सभी।।
चांद सितारे बुनके
अपना ये भरोसा झलकते
टिमटिमाती लै जला जाते
इन अभिज्ञ अखियों में मेरे।।
मेरे अब्बा
हां मेरे अब्बा सांझ सवेरे
कोहरा से डरे बिना
लक्ष्य सूझा जाते चुटकियों में।।
मानो जैसे भगवान हो मेरे
सर्वज्ञानी, सर्वव्यापी, हर चीज़ में
पलक झपकते छू मंतर हो जाते
तो कभी बिन बुलाए मेहमान बन जाते।।
पर हर क्षण मुझ पर ध्यान टिकाए
कामयाबियों का सफ़र नपवाते
हारों कर सामना सिखला जाते
मेरे अब्बा अखंड अभारे, हम आपके।।
नहीं जानती दिन होते कैसे हमारे
जो आप न होते मेरे इस ज़िंदगी प्यारे।
टूटे मोती जैसे बिखेरे होते हम चारो खाने
बिना आपके प्यारा के दानों के होते।।
ऐसे मेरे अब्बा
पापा कहते हम उनको
रात दिन एक कर जाते
मेरे एक मुस्कान को बरक़रार रखने खातिर।।
मेरे अब्बा
मेरे पापा।।
एड २०.०६.२०२१.
वर्षा मधुलिका।
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