Thursday, November 15, 2018

प्यार के मौसम (मुक्तक सीरीज़) Comments

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विरह धुप में जलते-जलते फिर से सावन आ जाये
मरुस्थल से रूखे सूखे में हरियाली यौवन छा जाये
एक बरसात जरुरी है बदन के प्यासे अंगो पर
बादल से बादल टकराये तो सारा समंदर समा जाये
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Raj Rathod
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Raj Rathod

Raj Rathod

Khargone, India
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