कन्नौज की महक Poem by Manjeshwari P MYSORE

कन्नौज की महक

Rating: 5.0

ताज़े महकते जामदानी गुलाब जब उबले, चाय की पुराने कुल्हड़ के मिट्टी के अंग, गुलाब संग
असली कुदरती इत्र ओर गुलाब जल, चंदन की तेल में य् गुले गुलाब और मिट्टी के महकते तरंग
गुलाबी संदली मिट्टी, बारिश की सौंधी खुशबू की सुगंध, महक की दास्तान की उमंग
इत्र की शीशी, कन्नौज की महक, महकता रहा सदा सदियों पुरानी रीवआजं हुनर के रंग.

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