मन करता है Poem by Kezia Kezia

मन करता है

मन करता है आसमान मे जाकर,
इंद्रधनुष की सवारी कर आऊँ
मन करता है फूलों को छूकर,
हाथो को अपने रंग पाऊँ
मन करता है पँछियों संग,
आसमान मे दौड़ लगाऊँ
मन करता है बूँदों मे भीगकर,
बदलो की सैर कर आऊँ
मन करता है रात को जाकर,
जाकर चंदा मामा से मिल आऊँ
मन करता है कोयल के संग,
सुरीला गाना मैं भी गाऊँ
मन करता है कुत्ते बिल्ली की बोली,
एक बार मैं भी समझ पाऊँ
मन करता है रंग बिरंगे पंख पाकर,
मोर की तरह नाचूँ गाऊँ
मन करता है पहाड़ों को बोना बनाकर,
उनसे एक बार हाथ मिलाऊँ
मन करता है चींटी को बड़ा बनाकर,
उसे नित नए खेल सिखाऊँ
मन करता है धरती का फेरा लगाकर,
वापस अपने घर आ जाऊँ
***

Tuesday, April 2, 2019
Topic(s) of this poem: childhood,nature
COMMENTS OF THE POEM
READ THIS POEM IN OTHER LANGUAGES
Close
Error Success