Wednesday, April 3, 2019

शीर ❤ Comments

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मचल जाता हूँ जब जब देखता तस्वीर हूँ उसकी,
है कितनी खूबसूरत रूह उसकी डूब जाता हूँ।
नहीं है खूबसूरत चाँद सी ना रात जैसी है,
अंधेरे में उजाला करने वाली चांदनी सी है।
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Ahtesham Poetry
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