मेरे मन में हो तुम Poem by Rinku Tiwari

मेरे मन में हो तुम

मेरे मन में हो तुम
तुम्हारे मन में हूं मैं।
जीवन में आना है
मरण में हर मन है।
इस संसार में कुछ
नहीं है जो वहां है।
वहां जो नहीं है
वह यहां भी नहीं है।
रोते-रोते जीना है
हंसते-हंसते मरना है।
जब से मैं मर चुका हूं
तब से मैं जी रहा हूं।

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