केदार देखकर
लगता है
जीते रहूँ तूफान में
अंतिम समय तक।
गंगा देखकर
लगता है
बहता रहूँ बंधन में
अंतिम साँस तक।
खेत की हरियाली देखकर
लगता है
युवा रहूँ बुढ़ापा में
अंतिम यात्रा तक।
थार देखकर
लगता है
उड़ता रहूँ आंधी में
अंतिम कड़ी तक।
हिन्द महासागर देखकर
लगता है
घूमता रहूँ घूर्णी में
अंतिम सूर्यास्त तक।
भारत माता को देखकर
लगता है
खिलता रहूँ उनकी गोद में
अंतिम संस्कार तक।
This poem has not been translated into any other language yet.
I would like to translate this poem