प्रेमास्त्र Poem by Rinku Tiwari

प्रेमास्त्र

प्यार कर के कोई
पाना चाहता अपना बदला
वह पुण्य जन को हृदय से
आमंत्रण करता ये जीवन
उससे बड़ा वह मित्र
जो प्रेमास्त्र चलाता
उसके राह पर स्वंय
पुष्प डालता ये जीवन
उससे भी उत्तम वह
जो प्रेम रस मे डुबाना चाहता
उसे मैं मानता अपना सर्वोस्व
सम्पूर्ण धन देता ये जीवन
उससे भी सर्वोत्तम वह
जो मुझे अपना सर्वस्व मानता
चाहे पीठ पर तलवार रखकर
कहता चाहिय़े तेरा ये जीवन

Monday, June 10, 2019
Topic(s) of this poem: love
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