तू आँगन बन सजती रहे Poem by Kezia Kezia

तू आँगन बन सजती रहे

Rating: 5.0

मैं मौसम बन इठलाऊँ,

तू हवा बन झूमती रहे।

मैं बादल बन मंडराऊँ,

तू बूँद बन बरसती रहे।

मैं भंवरा बन गुनगुनाऊँ,

तू फूल बन महकती रहे।

मैं आसमान बन फैल जाऊँ,

तू बिजली बन चमकती रहे।

मैं धरती बन बिछ जाऊँ,

तू फसल बन लहलहाती रहे।

मैं शब्द कोरे बन जाऊँ,

तू कागज़ पर उतारती रहे।

मैं सावन बन घिर आऊँ,

तू कोयल बन कूकती रहे।

मैं किनारे बन थम जाऊँ,

तू नदिया बन बहती रहे।

मैं कहानियाँ कहता जाऊँ,

तू मौन हुंकारे भरती रहे।

मैं लम्हा बन गुम होता जाऊँ

तू याद बन ठहरती रहे।

मैं चारदीवारी बन अड़ जाऊँ,

तू आँगन बन सजती रहे।

***

COMMENTS OF THE POEM
M Asim Nehal 20 August 2020

Outstanding...... Kya baat hai....100+++++++ Tum Chandni ban barasti raho Mai Chakora ban niharta jaoon.

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Rajnish Manga 20 August 2020

यहाँ प्रकृति के विविध आकर्षक रूपों द्वारा प्रेमी व प्रेमिका की आपसी समझ व उनके परस्पर संबंधों की मधुरतम अनुभूतियों को खूबसूरती से चित्रित किया गया है. बहुत सुंदर. हार्दिक धन्यवाद.

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