फिर कब मिलोगे Poem by Dr. Ravipal Bharshankar

फिर कब मिलोगे

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फिर कब मिलोगे बताओ मुझे
हर वक्त हमेशा याद आओगे

तुम्हारी तरहा मैं भी आया यहाँ
तुमसे मिला ज्ञान पाया यहाँ
ये पीठ मेरे जीवन में काम आयेगा
तुम्हारा मुझे याद नाम आयेगा
फिर कब मिलोगे बताओ मुझे..

कर्ज़ चुकता नहीं इल्म का पर कभी
फ़र्ज चुकता करु इल्म का मैं कभी
दुवा दो हमेशा मैं आगे बढ़ू
पढू इस कदर जग में नेकी गढू
फिर कब मिलोगे बताओ मुझे..

जाने कहाँ फिर मुलाक़ात हो
जाने कहाँ फिर मिले ना मिले
फिर कब मिलोगे बताओ मुझे..

Saturday, September 6, 2014
Topic(s) of this poem: student
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