A-071. कभी तुम मिल पाते Poem by Amrit Pal Singh Gogia

A-071. कभी तुम मिल पाते

कभी तुम मिल पाते 15.4.16- 10.33 AM

कभी तुम मिल पाते तो कैसा होता
नज़रें मुझसे मिलाते तो कैसा होता
बातें बहुत सारी तुम कर जाते हो
कभी मुझे सुन पाते तो कैसा होता

सोचा नहीं तुमसे मिलने से पहले
मिलकर जाना की तुमसे हैं हम
बिछुड़ जाना बना दस्तूर सा है
कभी साथ रह पाते तो कैसा होता

बादलों सा गरजना फूलों सा महकना
गुस्से भरी आँखें और प्यार से चहकना
कभी नज़रें चुराना कभी मुँह फेर लेना
कभी और प्यार जताते तो कैसा होता

आसमान से इरादे पूरे करने थे सारे
मेरे सारे सपने जो अब हुए हैं तुम्हारे
कहने को बहुत सी दिल में हैं बातें
कभी हम कह पाते तो कैसा होता

कभी हम मिल पाते तो कैसा होता
कभी तुम्हें सुन पाते तो कैसा होता

Poet: Amrit Pal Singh Gogia 'Pali'

Wednesday, June 8, 2016
Topic(s) of this poem: love
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