Amrit Pal Singh Gogia

Gold Star - 5,598 Points [Gogia] (27.7.1953 / Muzaffarpur)

Amrit Pal Singh Gogia Poems

1. A-056. आँख खुली तो चश्मा याद आया 2/25/2016
2. A-092. कौन सी तस्वीर 2/27/2016
3. A-064. उन लम्हों के संग 2/27/2016
4. A-042. अँधेरे को सूरज की रौशनी 2/27/2016
5. A-029. अपने ही अपने न हुए 2/27/2016
6. A-051. आओ चलो, लौट चलें 2/27/2016
7. A-083. आज मेरी आँखों में 2/27/2016
8. A-033. कविता कुछ उदास है 2/27/2016
9. A-096. बिसर गयीं यादें 2/28/2016
10. A-067. एक मेरे आने से 2/28/2016
11. A-063. इतने बेचैन क्यों हो 2/28/2016
12. A-065. एक अदद चाचू उधार दे दो 2/28/2016
13. A-043. एक वट वृक्ष के नीचे 2/29/2016
14. A-103. एक सच्ची कहानी 3/1/2016
15. A-074. तुम कौन हो 3/4/2016
16. A-085. तेरे होने का एहसास 3/6/2016
17. A-108. तेरे अंजुमन में 3/9/2016
18. A-128. मैंने अपने हाथों से 3/12/2016
19. A-023. कभी लौट के आना 3/13/2016
20. A-095. बात यूँ आगे बढ़ी 3/15/2016
21. A-141. सोलह सिंगार किये 3/18/2016
22. A-036. एक नयी सुबह 3/28/2016
23. A-024. एक रात मैं 4/1/2016
24. After Years & Years 4/2/2016
25. Autumn Leaf 4/4/2016
26. A-104. एक सुबह..........! 4/4/2016
27. A-132. रुक रुक के 4/5/2016
28. A-075. तुम खुद ही 4/6/2016
29. A-007. अच्छा लगता है 2/25/2016
30. A-091. नन्ही सी रौशनी 9.7.15 4/8/2016
31. A-129. मोहब्बत 4/8/2016
32. Let Me Go Down The Stream 4/11/2016
33. A-069. कुछ तो बात करो 4/11/2016
34. A-127. मैं वही हूँ 4/21/2016
35. A-055. पापा तुम झूठे हो 4/23/2016
36. A-059. चेहरे पे चेहरा 4/24/2016
37. A-110. मैं जानता हूँ 4/25/2016
38. A-060. पगला कहीं का 27.4.16 4/26/2016
39. A-053. कहार तू डोली उठा 4/27/2016
40. A-068. मेरी पड़ोसन 4/28/2016

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Best Poem of Amrit Pal Singh Gogia

A-002. आज मेरी कविता मेरे पास वापस आई है

आज मेरी कविता मेरे पास वापस आई है-18-4-15-7: 29 AM

आज मेरी कविता मेरे पास वापस आई है
पलकें नीचें हैं, थोड़ी घबराई है
थोड़ी शरमाई है, घूँघट में आई है
आज मेरी कविता मेरे पास वापस आई है

मेरी कविता का आना कोई अक्स्माती नहीं है
कई तूफानों के घेरे और कोई वाकिफ नहीं है
पता नहीं कितने थपेड़े वो सहती आई है
कितनी चोटें खा कर फिर भी मुस्कराई है

आज मेरी कविता मेरे पास वापस आई है

एक कदम उसने जब मेरी और बढ़ाया है
मन उसका एक बार तो बहुत घबराया है
घबराहट भी दिखती है उसके पसीने में
बेचैनी भी नज़र आती है उसके सीने में

आज मेरी कविता ...

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A-092. कौन सी तस्वीर

कौन सी तस्वीर 26.2.16—7.06 PM

हर पल तेरी तस्वीर बदलते देखी है
एक बार नहीं बार बार देखी है

एक पल तूँ प्यारी भोली भाली सी
दूजे पल मिर्ची गुलाल देखी है

तूँ मुस्कराये और फूल झरने लगें

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