Amrit Pal Singh Gogia
Muzaffarpur

Poems

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आज मेरी कविता मेरे पास वापस आई है-18-4-15-7: 29 AM

आज मेरी कविता मेरे पास वापस आई है
पलकें नीचें हैं, थोड़ी घबराई है
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2.
A-076. तुम न जाया करो
तुम न जाया करो -23.7.15- 9.10 AM

इतनी सज धज के
तुम न जाया करो
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3.
A-086. दर्द और रिश्ते
दर्द और रिश्ते 14.2.16—12.50 PM

दर्द और रिश्ते का रिश्ता भी कमाल है
बिना दर्द के बनता नहीं
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लम्हा लम्हा जिंदगी यूँ ही कटेगी 10.12.15—4.00 PM

लम्हा लम्हा जिंदगी यूँ ही कटेगी
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5.
A-034. किसने बुलाया
किसने बुलाया 20.3.16—7.32 AM

किसने बुलाया जो तुम चले आते हो
क्यूँ परेशान हो जो तुम छलक जाते हो
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6.
She Is My Girl Friend
She is my girl friend-17.9.15—7.18 PM

She is the one
The most beautiful girl
...
7.
A-101. आज सुबह….!
आज सुबह….! 12.4.16—8.14 PM

आज सुबह सूर्य देवता आये
और लगे मुझसे बतियाए
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8.
A-044. हाँ जमूरा हूँ
हाँ जमूरा हूँ 15.8.16- 7.29 AM

काठ की हाँडी अग्नि सवार है
जिंदगी के दिन केवल चार हैं
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क्यूँ करते रहते हो इशारे 5.12.15—6.21 AM

क्यूँ करते रहते हो इशारे
जब पास आना नहीं है
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10.
A-105. ऐ मेरे मन
ऐ मेरे मन 21.2.16—7.35 PM

ऐ मेरे मन!
कैसी उदासी व कैसा प्रसंग
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5/16/2021 11:50:43 PM # 1.0.0.578