A-088. न कोई अपना है Poem by Amrit Pal Singh Gogia

A-088. न कोई अपना है

न कोई अपना है 5.1.16—1.44 AM

न कोई अपना है न कोई बेगाना
किसके लिए लिखना
किसके लिए गाना

हर कोई मोहरा है हर कोई दीवाना
रोना भी कला है हँसना भी बहाना

न कोई गीत है न कोई संगीत है
मतलब निकालना दुनिया की रीत है

दर्द की इन्तिहा का न करे जिक्र कोई
अपनी अपनी निभाये न करे फ़िक्र कोई

दिल के निशां भी किसी काम के नहीं
कोई भी पहुँचा नहीं किसी अंजाम पे कहीं

अश्क न बहा फरियाद न कर
जख्म अपने यूँ खुर्द खराब न कर

क्या दिया क्यूँ न दिया अब याद न कर
किसी की खातिर दम तोड़ने की बात न कर

Poet: Amrit Pal Singh Gogia 'Pali'

A-088. न कोई अपना है
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