न गुजारा हो अमीरों का 7.7.16—10.25 PM
न गुजारा हो अमीरों का
न गुजारा हो गरीबों का
न उनके किसी यार का
मध्य वर्गीय परिवार का
गुजारा उनका भी नहीं
जो बड़े बलिष्ठ कहलाते हैं
जो खुद कमजोर बताते हैं
जो बड़े वृद्ध विद्वान हो गए
जो बन बुद्धू किसान हो गए
जो स्वयं ही भगवान् हो गए
जो बलपूर्वक शैतान हो गए
जो लोगों के लिए ईमान हो गए
जो पैसे खातिर बेईमान हो गए
जो सधे सधे शिल्पकार हो गए
जो सधे सधे अदाकार हो गए
जो राजे बन धनवान हो गए
पंडित अहंकारी महान हो गए
दानवीर बन जजमान हो गए
जो क्रन्तिकारी कुर्बान हो गए
गुजारा उनका होता है जो गुजारा करते हैं
रूखी सूखी खाके भी प्रभु पुकारा करते हैं
खुद खाकर औरों को भी खिलाते रहते हैं
दूसरों का भरा पेट देख मुस्कराते रहते हैं
Poet: Amrit Pal Singh Gogia 'Pali'
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