A-121 एक सवाल Poem by Amrit Pal Singh Gogia

A-121 एक सवाल

A-121 एक सवाल 27.12.17-8: 03 AM

एक सवाल बार बार आ रहा है
क्या हुआ सबको चौंका रहा है
अंतर्मन की बात अगर करो तुम
मन तटस्थ है प्रभु को पा रहा है

प्रभु को कोई तो बहाना चाहिए
किसी को बड़ी उम्र का बताकर
किसी की बिमारी बड़ी बताकर
किसी को झगड़ों में उलझा कर

किसी के दिल को ठेस पहुँचाकर
आपको आपकी नजरों में गिराकर
किसी को जैसे अमीरी से गिराकर
उसके अहम को उसी में फसांकर

कोई किसी के प्यार में कुर्बान हुआ
कोई देश की खातिर बलिदान हुआ
कोई किसी के झगडे में उलझ गया
कोई राह चलते खुद ही फिसल गया

एक प्रक्रिया है जो घटित हो रहा है
कुछ भी नया नहींरचित हो रहा है

हर उम्र का अपना ही एक पड़ाव है
जो समझ ले उसके लिए ठहराव है

जितना भी तुम ऐतराज़ करोगे
उतना तटस्थ हो के रह जायेगा
मन की बेचैनी बढ़ती जाएगी
जीना भी मुश्किल हो जायेगा

जो आया है उसको सहज आने दो
बिमारी को अपनी जगह बनाने दो
शारीरिक दर्द बनता है तो बनता रहे
मन का स्वस्थ रख उसको समाने दो

A-121 एक सवाल
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