A-176 मामूली सी बात 28.12.17—4.01 AM
मामूली सी बात है मगर इन्कार नहीं है
यही तो मेरी ज़िंदगी है जज़्बात नहीं है
कभी आज़मा कर देख लेना तुम मुझे
ज़िंदगी तो है पर कोई हिसाब नहीं है
सपने हमने भी संग रहकर संजोये थे
ऐसा नहीं है कि मेरा क़िरदार नहीं है
रेतीले टीले पर भी पौधे उग आते हैं
इनके आने का उसका करार नहीं है
तन्हा सफर पर कोई तो अपना होगा
अपनों से रिश्ता इतना खराब नहीं है
ढूँढोगी मुझे जब कभी तन्हाई होगी
मिलूंगा तुमको कोई मलाल नहीं है
तेरी तन्हाई का दर्द मुझे भी होता है
ऐसा भी नहीं है कि सरोकार नहीं है
हम अब भी तेरी राह को तक रहे हैं
यह जिंदगी है कोई अवसाद नहीं है
चली आना तुम मामूली सी बात है
ऐसा नहीं है कि तुमसे प्यार नहीं है
Poet: Amrit Pal Singh Gogia "Pali"
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