A-180 कौन सी तस्वीर Poem by Amrit Pal Singh Gogia

A-180 कौन सी तस्वीर

A-180 कौन सी तस्वीर 26.2.16—7.06 PM

कौन सी तस्वीर बनाऊँ तुम्हारी
हर पल मटकती बयार देखी है

एक पल प्यारी भोली भाली सी
दूसरे पल मिर्ची गुलाल देखी है

मुस्कराये और फूल झरने लगें
दूजे पल सूखी टटाल देखी है

कभी अदा निराली सुर्ख लाली
दूजे पल शर्म से लाल देखी है

कभी मतवाली मदमस्त निराली
कभी रोती हुई जार जार देखी है

बहुत सहज़ता की मूरत भी देखी
कभी होती बहुत बेकरार देखी है

कभी होंठ सिले हुए ह्या का पर्दा
कभी बक बातूनी बेवाक देखी है

उमड़ जाये तो प्यार भी क़ाबू नहीं
कभी नफरत से भरी नार देखी है

देखा है अपनी बाँहों में गिरते हुए
कभी नाक चढ़ी कई बार देखी है

हर पल तस्वीर बदलती तुम्हारी
जितना छिपाओ बार बार देखी है

Poet; Amrit Pal Singh Gogia "Pali"

A-180 कौन सी तस्वीर
Tuesday, March 10, 2020
Topic(s) of this poem: friendship,love
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