A-183 होली के रंग 2.3.18- 3.37 AM
होली के रंग उमंगों के संग
ऐसे मनाओ जैसे कोई जंग
पूरी आज़ादी दिखे हर अंग
ज़िंदगी के रंग हों अपने ढंग
फूल खिले जोशीले रंग में
जैसे उड़ते अपने उपवन में
चुनरी भी उड़े उनके संग में
अंगिआ समेटे अपने ढंग में
ऊँच नीच से ऊपर उठ कर
गले लगे हम हरेक जन के
गिले शिक़वे भी दूर हो गए
धुल गयी विष मैल मन से
लकीरों को तदबीर समझ
मज़हब बीच में लाए नहीं
अपने गालों पर रंग उनका
देख जरा भी घबराये नहीं
होली का जो जश्न मनाया
ऐसे कभी हम इतराये नहीं
जो कभी मीलों दूर रहते थे
उनके जैसा कोई भाई नहीं
Poet: Amrit Pal Singh Gogia "Pali"
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