A-200 जरुरी तो नहीं Poem by Amrit Pal Singh Gogia

A-200 जरुरी तो नहीं

A-200 जरुरी तो नहीं 4.1.18- 4.10 AM

क्या यह जरुरी है कि हमें
अपने हर ज़ख्म छिपाने ही होंगे
क्या करेंगे उनका जो नासूर बन गए
वो तो दिखाने ही होंगे

इलाज़ तो मर्ज़ का ही होगा
चाहे वह नये हों या पुराने होंगे
तन्हाई में सकून भी देते हों पर
रस्मी तरीके तो निभाने होंगे

कुछ दर्द अच्छे लगते हैं
जिनकी वजह से गले मिलाने होंगे
अपनों ने जो ज़ख्म दिये
उनमें से कुछ तो फेहरिस्त में होंगे

कुछ तो चुकता हो चुके
और कुछ के अभी भी चुकाने होंगे

मलाल न कर ये बुरे नहीं
बेगानों का फ़र्क ही तो बताते हैं
अपनों में जो गैर छिपे हैं
उनका मुखड़ा भी तो दिखाते होंगे

Poet: Amrit Pal Singh ‘Gogia'

A-200 जरुरी तो नहीं
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