Menu
Saturday, January 30, 2016

Aag Lagane Ki Adat (Hindi) आग लगाने की आदत

Rating: 5.0
इंसान को तो आग लगाने की आदत है यारो
इंसानों में भी, बेझिझक आग लगा देता है।

आग से खेलना, उसकी फितरत हो शायद
आग के खेल में खुद को भी जला लेता है।

जो आग नहीं लगाता वह भी कहाँ है कम
दूसरों की लगी आग को, खड़े ताप लेता है।

आग में तप कर के, सोना निखार जाये चाहे
इंसान झुलस आग में, कोयला कर लेता है।

आग जलाती उन चीजों को, जिनके दिल में आग
इंसान दिल में आग लिये, आग भी जला देता है।

आग का खेल कुछ इस तरह जमता उसको
लगाने बुझाने में एसडी, उम्र गुजार लेता है।

एस० डी० तिवारी
S.D. TIWARI
Topic(s) of this poem: hindi
READ THIS POEM IN OTHER LANGUAGES
COMMENTS
Rajnish Manga 31 January 2016
?????????? ???? ??? ???? ???? ??????? ?? ????? ???? ????? ??, ?????? ??. ???? ?? ?????. ?? ?? ??? ??? ?? ??? ???? ???? ????? ?????? ??? ????, ???? ????? ???? ???
0 0 Reply

Stopping By Woods On A Snowy Evening

Delivering Poems Around The World

Poems are the property of their respective owners. All information has been reproduced here for educational and informational purposes to benefit site visitors, and is provided at no charge...

1/16/2021 10:10:48 PM # 1.0.0.396