Balak (Hindi) बालक Poem by S.D. TIWARI

Balak (Hindi) बालक

Rating: 5.0

सहज खींच लेती अपनी ओर
नन्हे एक बालक की मुस्कान।
अमृत सी लगाती बोली उसकी
तुतलाती जब घुसती कान।
गोदी में आकर बैठ जाता तो
मिटा देता सारी थकान।
नन्हें हाथों का कोमल स्पर्श
लगता है ह्रदय को शुभान।
माँ के उर आनंद भर देता
गोदी में बालक का अरमान।
अंगना में खेले जब बालक
घर लगता है स्वर्ग समान ।
बच्चे होते राष्ट्र धरोहर
आने वाले कल की शान।
कर्त्तव्य है हम सबका देना
अच्छा पोषण, उत्तम ज्ञान।

एस० डी० तिवारी

Saturday, November 7, 2015
Topic(s) of this poem: child,hindi
COMMENTS OF THE POEM
Kumarmani Mahakul 07 November 2015

A child learn very frequently and easily from direct observation from his own experience. A thought shining poem shared with nice composition.10

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Sd Tiwari 08 November 2015

Thank you very much

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Rajnish Manga 07 November 2015

बच्चों का हमारे जीवन में क्या महत्व है, आपकी इस कविता में इसे सुंदर तरीके से समझाया गया है. उनका ध्यान रखना हमारा परम कर्तव्य है. धन्यवाद, मित्र. बच्चे होते राष्ट्र धरोहर आने वाले कल की शान।

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Sd Tiwari 08 November 2015

हार्दिक धन्यवाद रजनीश माँगा जी

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Abdulrazak Aralimatti 07 November 2015

Verily, a child is like an angel, innocent and a treasure of joy

1 0 Reply
Sd Tiwari 08 November 2015

Thank you, Poet!

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