शूद्रों के नायक - Bollywood से Kollywood, Tollywood से Sandalwood और Mollywood तक Poem by Pushp Sirohi

शूद्रों के नायक - Bollywood से Kollywood, Tollywood से Sandalwood और Mollywood तक

कभी कहा गया—
तुम कौन हो?
तुम्हारी जाति क्या है?
तुम्हारा काम क्या है?
तुम्हारी औक़ात क्या है?

और आज वही सवाल
सिनेमा के पर्दे पर लौटता है—

नायक कौन है?

वह जो मुकुट पहनता है?
वह जो सिंहासन पर बैठता है?
या वह
जो मिट्टी से उठकर
लाखों दिलों की धड़कन बन जाता है?

---

Bollywood के पर्दे पर,
जब एक साधारण चेहरा
करोड़ों की उम्मीद बनता है,

तो कैमरा सिर्फ़ चेहरा नहीं दिखाता—
एक सामाजिक परिवर्तन रिकॉर्ड करता है।

Kollywood की धरती पर
जब मेहनतकश हाथ
नायक की मुट्ठी बनते हैं,

तो कहानी कहती है—
जिस हाथ को कभी नीचे रखा गया,
वही हाथ
अब परदे पर आसमान उठाता है।

Tollywood में
जब किसान, मज़दूर और आम आदमी
नायक की चाल चलता है,

तो गाँव की धूल
सिनेमा की रोशनी में
इतिहास लिखती है।

Sandalwood में
जब मिट्टी का बेटा
पर्दे पर गरजता है,

तो पहाड़ों से लेकर शहरों तक
एक आवाज़ सुनाई देती है—

नायक जन्म से नहीं,
कर्म से बनता है।

और Mollywood की कहानियों में
जब आम मनुष्य
असाधारण संघर्ष करता है,

तो पर्दा पूछता है—

जिसे समाज ने छोटा समझा,
क्या उसकी कहानी छोटी थी?

नहीं।

क्योंकि
सदियों तक जिनके हाथों ने
खेत जोते,
सड़कें बनाईं,
घर खड़े किए,
शहर बसाए—

आज वही हाथ
कैमरे के सामने
नायक का चेहरा लिख रहे हैं।

यह केवल सिनेमा नहीं—

यह उस पुराने प्रश्न का उत्तर है
जो पीढ़ियों से पूछा गया:

"तुम कौन हो? "

और पर्दे से आवाज़ आती है—

"मैं वही हूँ
जिसे तुमने कभी नीचे लिखा था;
आज मेरी कहानी
तुम सबसे ऊपर देख रहे हो।"

जाति ने नाम बाँटे,
सिनेमा ने चेहरे दिए।

जाति ने सीमाएँ खींचीं,
कला ने पर्दे तोड़ दिए।

और जब
Bollywood, Kollywood, Tollywood,
Sandalwood और Mollywood
एक साथ रोशन होते हैं,

तो भारत का विशाल पर्दा कहता है—
नायक किसी जाति की जागीर नहीं।

नायक वह है

जिसकी कहानी जनता अपने दिल में रख ले।

और शायद
सिनेमा का सबसे बड़ा संवाद यही है—
जिसे इतिहास ने हाशिये पर लिखा,
वही कल
इतिहास का मुख्य पात्र बन सकता है।

पर्दा जब उठता है,
तो नाम नहीं—नायकत्व दिखाई देता है।

Bollywood में — Amitabh, Shah Rukh, Aamir, Salman;
Kollywood में — Rajinikanth, Kamal Haasan, Vijay, Suriya;
Tollywood में — Chiranjeevi, Nagarjuna, Prabhas, Allu Arjun;
Sandalwood में — Dr. Rajkumar की विरासत से Yash तक;
Mollywood में — Mammootty, Mohanlal, Fahadh Faasil तक—

चेहरे अलग,
भाषाएँ अलग,
कहानियाँ अलग—

पर एक सच एक:

नायक बनने के लिए

किसी जाति की अनुमति नहीं चाहिए।

जिस समाज ने कभी
कुछ लोगों को पर्दे के बाहर रखा,
आज वही पर्दा
उनकी कहानियों से जगमगा रहा है।

सिनेमा का असली नायक वह है—
जिसे जनता अपना बना ले।

Friday, September 25, 2026
COMMENTS OF THE POEM
READ THIS POEM IN OTHER LANGUAGES
Close
Error Success