ये मन बावरा मेरा ना जाने कहाँ जाने की चाह रखता है …
छल्ला है वो जो रेगिस्तान में भी डूबने की चाह रखता है …
लोग कहेते है प्यार आग का दरिया है , पर ये दीवाना उस आग में भी तैरने की चाह
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A sublime start with a nice poem, Meera. You may like to read my poem, Love And Lust. Thank you.