Hasmukh Amathalal

Gold Star - 789,554 Points (17/05/1947 / Vadali, Dist: - sabarkantha, Gujarat, India)

दंगल.. Dangal - Poem by Hasmukh Amathalal

दंगल
बुधवार, १५ जनवरी २०२०

संसार एक जंगल है
पूरा का पूरा दंगल हैं
लेकिन कायदे से बाधित है
हर चीज़ सम्बंधित है।

कितना ही जुड़ाव क्यों ना हो!
कितना ही लगाव क्यों ना हो!
हमें यहाँ ही रहना है
अपनी दुनिया मैं हीविचरना है।

ना उसको कोई नियंत्रित कर पाया है
और ना ही हमने इजाजत दी है
अपना ख्याल है और अपनी दुनिया
इसी को तो कहते है माया!

ना किसी ने यहाँ महात्मा बनना है
और ना ही उपदेश देना है
सदियों सेपर यूँ कहो की उत्पति होने
और आजतक हमने संवारे है अपने कोने।

संसार यूँही चलता रहेगा
अपने आप महेकता रहेगा
कोई सुनहरा फूल संसार को मोहित कर देगा
अपनी छाप पीछे छोड़ कर चला जाएगा।

ये संसार का नियम है
और उसपर दुनिया कायम है
दिल अंदर से मुलायम है
जो भी करना है शुभस्य शिग्रम है।

हसमुख मेहता

Topic(s) of this poem: poem


Comments about दंगल.. Dangal by Hasmukh Amathalal

  • Mehta Hasmukh Amathalal (1/14/2020 7:53:00 PM)

    ये संसार का नियम है
    और उसपर दुनिया कायम है
    दिल अंदर से मुलायम है
    जो भी करना है शुभस्य शिग्रम है।

    हसमुख मेहता
    (Report)Reply

    0 person liked.
    0 person did not like.
Read all 1 comments »

Maya Angelou

Caged Bird



Read this poem in other languages

This poem has not been translated into any other language yet.

I would like to translate this poem »

word flags


Poem Submitted: Tuesday, January 14, 2020



[Report Error]