बस नाम रहेगा कृष्णा का Poem by Dr. Yogesh Sharma

बस नाम रहेगा कृष्णा का

बस नाम रहेगा कृष्णा का,
रहता जो हर श्वास, हर धड़कन में।
हम भी देखेंगे, तुम भी देखोगे,
और सारा जग भी देखेगा।
वह दिन आएगा—
जिसका संकल्प स्वयं प्रभु ने
गीता के अमर वचनों में अंकित किया।
जब अन्याय अपनी अंतिम सीमा लाँघ जाएगा,
अधर्म का अहंकार
तिनकों-सा बिखर जाएगा।
धरती काँपेगी जन-जन के चरणों तले,
हुक्मरानों के मुकुट थरथराएँगे,
आकाश में बिजली अग्निशिखा बन चमकेगी,
मेघ धर्म के नगाड़ों-से गरजेंगे,
और समय स्वयं साक्षी बनेगा
उस अंतिम परिवर्तन का।
इस रंग बदलती दुनिया से
जब सबको बुलावा आएगा,
तब पद, प्रतिष्ठा और वैभव नहीं,
केवल कर्म साथ जायेंगे।
जिन्हें नहीं दिया सम्मान जग ने कभी,
जिन्हें तीर्थों ने भी अपना न माना,
वे प्रभु के सम्मुख
आदर के आसन पर विराजेंगे।
मुकुट उतर जाएँगे,
सिंहासन बदल जाएँगे,
सत्ता की सारी दीवारें
क्षण भर में ढह जाएँगी।
तब भी—
बस नाम रहेगा कृष्णा का,
जो सदा साथ में रहता है।
वह आँखों से ओझल होकर भी
हर क्षण सम्मुख है।
वही एकमात्र शाश्वत सत्य है।
तुम भी रहोगे, मैं भी रहूँगा,
पर सबसे ऊपर बस
नाम रहेगा कृष्णा का।
जब वह प्रकट होगा,
तो करुणा भी साथ होगी,
न्याय भी साथ होगा।
समस्त सृष्टि में
उसी का प्रकाश, उसी का राज्य होगा।
तब भी तुम रहोगे,
मैं भी रहूँगा,
पर अमर होगा केवल
नाम रहेगा कृष्णा का।
आओ, उसी अनन्त सत्य का जाप करें—
एक स्वर, एक हृदय, एक विश्वास के साथ—
हरे कृष्ण, हरे कृष्ण,
कृष्ण कृष्ण, हरे हरे।
हरे राम, हरे राम,
राम राम, हरे हरे॥

बस नाम रहेगा कृष्णा का
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