कैसे शुक्र अदा करूँ, उस्ताद! आपका
माँ-बाप के बराबर ओहदा है आपका
बंजर ज़मीन सींचकर ज़रख़ेज़ कर दिया
तालीम-ओ-तरबियत, ये आदाब आपका
कैसे शुक्र अदा करूँ, उस्ताद! आपका
रौशन किया दिमाग़ और दुनिया सँवार दी
इल्म-ओ-अदब से मेरी हस्ती निखार दी
दौलत मिली, इज़्ज़त मिली, शोहरत भी बेपनाह
रहबर नहीं, न हमदम, मेरा है आप-सा
कैसे शुक्र अदा करूँ, उस्ताद! आपका
माँ-बाप के बराबर ओहदा है आपका
बेख़बर, अनजान, ग़ाफ़िल, था सिफ़र नादान मैं,
रफ़्ता-रफ़्ता, धीरे-धीरे बन गया ज़कवान मैं।
हर मुअल्लिम से ख़ुसूसी चाहता हूँ रहबरी,
शागिर्द हूँ, करूँगा मैं दिल शाद आपका।
माँ-बाप के बराबर ओहदा है आपका
✍️@Nadir Hasnain
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