तू न मान ना हार Poem by Janid Kashmiri

तू न मान ना हार

Rating: 5.0

वक्त तुझपे करे अगर अत्याचार
तू न मान ना हार
जले दुनिया, जलें सब कार
तू न मान ना हार

मुश्किलें आएं कितनी भी भारी
तू हर कदम चल, न हो बेचारी
आंधियों से लड़, बन जा पतवार
तू न मान ना हार

सपनों की राह में हों कांटे हजार
दिल में रख हौसला, हर दर्द हो बेकार
छोड़ ना अपने जज़्बातों का संसार
तू न मान ना हार

मंज़िलों की ओर रखता जा तू कदम
हर मुश्किल को बना ले तू संग्राम
हिम्मत की ताकत से कर हर दीवार पार
तू न मान ना हार

हार-जीत का खेल है ये संसार
दृढ़ निश्चय से तू कर हर हार स्वीकार
जीत का है हकदार वही जो न डरे हार
तू न मान ना हार

जब तक हो सांस, चलती रह संग हवा
जीवन की इस यात्रा में बना रह सदा
हर हाल में तू कर खुद से ये इकरार
तू न मान ना हार

COMMENTS OF THE POEM
M. Asim Nehal 19 June 2024

Chalte rehna jeevan ki nishani hai.....Bahut Khoob.5*****

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