Jawani So Rahi (Hindi) जवानी सो रही Poem by S.D. TIWARI

Jawani So Rahi (Hindi) जवानी सो रही

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जवानी सो रही


चढ़े उन्माद चोटी तक, थिरकता गीत गाओ तुम।
खड़े हों उठ वतन वाले, लहर ऐसी उठाओ तुम।
रिपु अनेक घुस आये, इस जमीं को कर रहे जख्मी,
जवानी सो रही देखो, उसे कविवर जगाओ तुम ।


घेरी आलस्य निद्रा है, शर शब्द चलाओ तुम।
काई, पड़ी जो ऊपर है, शब्दों से हटाओ तुम।
लुट न जाये सब कुछ, सोती रह जाय जवानी ये,
भूली है जो दिशा मंजिल, फिर से चेताओ तुम।


पड़ा शीतल जो रग में रक्त, उसकी ताप बढ़ाओ तुम।
जमे न कहीं निरर्थक वो, आंच देकर खौलाओ तुम।।
कर रहे शत्रु कुछ भी हैं, सहती जा रही जवानी,
ना हो गड जाय सिर नीचे, फिर, उसे बताओ तुम।


हुए शहीद अनेकों वीर, शौर्य गाथा सुनाओ तुम।
सोये पड़े हैं जज्बे, उन्हें झकझोर जगाओ तुम।
है भटका जा रहा युवा, बनकर पथ प्रदर्शक तुम,
लगा दो आग कलम से, राह में दीप जलाओ तुम।


मौकापरस्तों में आज वतन परस्ती जगाओ तुम।
त्यागें स्वार्थ वे, अलख, देश भक्ति का जलाओ तुम।
कहाँ राणा, शिवाजी, सुभाष, आजाद; बुलाओ तुम।
लाये जो रवानी वह, जुनूं का बिगुल बजाओ तुम।


- एस० डी० तिवारी



Zest of poem - poets! awake the sleeping youth, enemies are ruining the land.

Monday, January 4, 2016
Topic(s) of this poem: patriotic
COMMENTS OF THE POEM
Rajnish Manga 04 January 2016

सोये पड़े हैं जज्बे, उन्हें झकझोर जगाओ तुम। है भटका जा रहा युवा, बनकर पथ प्रदर्शक तुम, लाये जो रवानी वह, जुनूं का बिगुल बजाओ तुम।..... जन जन में आज देशभक्ति का जज्बा जागृत करना बेहद ज़रूरी है. इस तथ्य को रेखांकित करने वाली इस रचना की सामयिक प्रस्तुति हेतु धन्यवाद.

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