जुदाई दिल से नहीं.. Judaai Dil Se Poem by Mehta Hasmukh Amathaal

जुदाई दिल से नहीं.. Judaai Dil Se

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जुदाई दिल से नहीं
रविवार, ४ जुलाई २०२१

नविन ने बताया भी नहीं
और जताया भी नहीं
हमने दिल से कभी पूछा ही नहीं
पर मन ने बारबार कहा यही।

दोस्त तो होते ही ऐसे
पर ना भुलाते दिल से
मनपर आ के छा जाते है
बीन बुलाए आ जाते है।

जुदाई दिल से नहीं
महोब्बत का रंग यूँही

जुदाई दिल से नहीं
रविवार, ४ जुलाई २०२१

नविन ने बताया भी नहीं
और जताया भी नहीं
हमने दिल से कभी पूछा ही नहीं
पर मन ने बारबार कहा यही।

दोस्त तो होते ही ऐसे
पर ना भुलाते दिल से
मनपर आ के छा जाते है
बीन बुलाए आ जाते है।

जुदाई दिल से नहीं
महोब्बत का रंग यूँही पुरा होता नहीं
जब की दिल याद करता रहे
और मन मनसा पूरी करता रहे।

चुप रहकर भी चुप नहीं हो पाओगे
अपनी आत्मा को कुबुल नहीं करवा पाओगे
भूल सकते हो तो भूलकर दिखाओ
हमें भी खूबसूरत आइना दिखाओ।

वही पाओगे जो चाहते हो
मांगो जो भी मांगते हो
कहते रहो, सुनते रहो, सुनाते रहो
जब भी मिलो सामने दुआ देते रहो।

डॉ हसमुख मेहता

जुदाई दिल से नहीं.. Judaai Dil Se
POET'S NOTES ABOUT THE POEM
वही पाओगे जो चाहते हो मांगो जो भी मांगते हो कहते रहो, सुनते रहो, सुनाते रहो जब भी मिलो सामने दुआ देते रहो। डॉ हसमुख मेहता
COMMENTS OF THE POEM

Rajbanshi manmohan

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Salr eemSalr eemto

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Shah pushpaben

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Rajesh doshi

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Kalpesh doshi

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God gift chukwu

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Rajesh desai

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Shrenik ramanlal shah

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Parasor dhan maya

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Sarla balachandran

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Mehta Hasmukh Amathaal

Mehta Hasmukh Amathaal

Vadali, Dist: - sabarkantha, Gujarat, India
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