Tuesday, August 8, 2023

जंगल में आग लगी है ~ Comments

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जंगल में आग लगी है
और मेरे घर कोसों दूर है
पेड़ पौधे जल रहे हैं
शोले भड़क रहे हैं
...
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M. Asim Nehal
COMMENTS
M. Asim Nehal 12 August 2023

हमारे भीतर का इंसान मर चूका है, इंसानियत ख़त्म हो गयी है, ये कविता हमें खुद आईना दिखने का एक प्रयास है, की देखो अपने चेहरों को और सोचो क्या से क्या हो गए हैं हम.

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M. Asim Nehal 12 August 2023

आज समाज को हमने वर्गों बे बाँट दिया है, धर्म के नाम पर जाती के नाम पर, स्थान के नाम पर और न जाने कितने और नए तरीके विभाजन के और खोज लाये हैं, और जब कहीं अत्याचार होता है हम ये कहकर की इससे हमें कोई सरोकार नहीं है तमाशा देखने लगते हैं

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Rajan T Renganathan 11 August 2023

Brilliant poem, Kya baat hai, I will translate it in English.

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Deepak S S 08 August 2023

इस कविता में सीक है, कविता सोचने पर मजबूर करती है, आज के हालत की सही समीक्षा करती है

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M. Asim Nehal 12 August 2023

धन्यवाद दीपक जी आपने कविता का सही विश्लेषण किया है और कवी जो कहना छह रहा है उसके अत्यधिक रूप से उजागर किया है I

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Deepak S S 08 August 2023

जंगल में आग लगी है एक कटाक्ष भरी कविता है, हम ये समझ कर संतोष पते हैं की हम सुरक्षित हैं लेकिन कब ये सुरक्षा कवच हट जायेगा इसके बारे मैं नहीं सोचते

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M. Asim Nehal

M. Asim Nehal

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