Hasmukh Amathalal

Gold Star - 389,843 Points (17/05/1947 / Vadali, Dist: - sabarkantha, Gujarat, India)

माफ़ ही कर दूंगाmaaf Hi Kardunga - Poem by Hasmukh Amathalal

आज तूने मुझे खूब रुलाया
जब मे सपनेमे तेरे आया
वहां कोई नहीं था मुझें बुलाने
सिर्फ तुही अकेली थी मुझ को संताने

में हँसता हु सिर्फ दिखाने के लिए
और कोसता रहता हूँ, गम मिटाने के लिए
गम तो सिर्फ एक बहाना है
अब रह गया बाकी, आंसू बहाना है

जब खुद को ही समज ना पाया
दूर टूजी को पाकर खूब रोना आया
पर शर्मिंदगी तो इस बात की है
तूने देखा फिर भी बात नहीं की है

अच्छा तो होता जब आँखे फेर ही लेती
ना बनती कोई लेती और देती
पर आँख चुरा ली महोब्बत का वादा डेकर
में भी सुनता रहा सिर्फ अन्धा बंन कर

सीना तो छलनी हो ही गया
उपर से आपने छोड़ दिया
में दर दर अब नही भटकुंगा
हो सकता है दिल से उसे माफ़ ही कर दूंगा

Topic(s) of this poem: poem, poet


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Poem Submitted: Wednesday, January 13, 2016



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