महुआ (पूरबी गीत)
कैसे हम काटब दईया, अकेले ई रैन हो।
मधु पियाय के महुआ, करेला बेचैन हो।
ऋतुराज आयी गइलें, पिया अबे नाहीं अइलें,
चुये लागल हे सखिया! महुआ के फूल।
एहि चइते मधुमास में, रही गईलिन आस में,
छुए लागल हे सखिया, महुआ के फूल।
चंपा गुलाब फूलल, रे वन में पलाश फूलल,
फूले लागल हे सखिया, महुआ के फूल।
उजर उजर रतिया में, फइलल अजोरिया में,
महके लागल हे सखिया, महुआ के फूल।
पियावेला अकेले 'देवा' रसवा ले आयी हवा,
चढ़े लागल हे सखिया, महुआ के फूल।
एस. डी. तिवारी
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