Hasmukh Amathalal

Gold Star - 740,660 Points (17/05/1947 / Vadali, Dist: - sabarkantha, Gujarat, India)

पलभर Pal - Poem by Hasmukh Amathalal

पलभर

जिंदगी से मुझे प्यार आ गया
हवा के एक झोके से में शर्मा गया
बहार थी चारो और फिर इश्कि बहार का क्या कहना?
में मन में चलते कुविचार कैसे कर सकते थे सामना?

हमने सोचा बहुत हो गया अकेलापन
अब तो हो जाए इतका समापन
मै तो चला नैसर्गिक गोद में
बस सिर्फ एक स्वर्गिक सोच और याद में।

क्या फूल थे?
क्या रंग थे?
सब हँसते ही तो थे
मेरा मजाक उड़ा रहे थे।

में पलभर अपने आपको भूल गया
सही मायनो में खो गया
आज पता पड़ा प्यार क्या होता है
जो गैर होकर अपना सा लगे वो ही प्यार है।

बस अपना जीवन अपना है
खामोश कभी नहीं रहना है
सब से बाते और साथ रहना है
हो सकता मीठापन जवान पर रखना है।

Topic(s) of this poem: poem


Comments about पलभर Pal by Hasmukh Amathalal

  • Mehta Hasmukh Amathalal (8/12/2017 6:41:00 AM)

    बस अपना जीवन अपना है
    खामोश कभी नहीं रहना है
    सब से बाते और साथ रहना है
    हो सकता मीठापन जवान पर रखना है।
    (Report)Reply

    0 person liked.
    0 person did not like.
Read all 1 comments »



Read this poem in other languages

This poem has not been translated into any other language yet.

I would like to translate this poem »

word flags


Poem Submitted: Saturday, August 12, 2017



Famous Poems

  1. Still I Rise
    Maya Angelou
  2. The Road Not Taken
    Robert Frost
  3. If You Forget Me
    Pablo Neruda
  4. Dreams
    Langston Hughes
  5. Annabel Lee
    Edgar Allan Poe
  6. Stopping By Woods On A Snowy Evening
    Robert Frost
  7. If
    Rudyard Kipling
  8. Do Not Stand At My Grave And Weep
    Mary Elizabeth Frye
  9. I Do Not Love You Except Because I Love You
    Pablo Neruda
  10. Television
    Roald Dahl
[Report Error]