पहली नज़र का यक़ीन Poem by Pushp Sirohi

पहली नज़र का यक़ीन

पहली नज़र में ही दिल को लगा
ये वही है जो मुक़द्दर को लगा

मैंने देखा नहीं कुछ और फिर
जब से तेरा चेहरा नज़र को लगा

लोग कहते हैं संभल जा पुष्प
मगर इश्क़ भी कोई ज़हर नहीं लगा

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