झूठा सही, इश्क़ Poem by Pushp Sirohi

झूठा सही, इश्क़

हमने चाहा जिसे टूट कर उम्र भर
वो हमें फिर भी कभी मिला नहीं

दर्द इतना था कि सहना मुश्किल
और वो था कि कभी झुका नहीं

आज भी यही कहता है पुष्प
कि इश्क़ झूठा था — पर बुरा नहीं

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