गर्व से कहो — हम भारतीय हैं Poem by Pushp Sirohi

गर्व से कहो — हम भारतीय हैं

मैं उस मिट्टी का बेटा हूँ
जिसके कण-कण में इतिहास धड़कता है,
जहाँ पत्थर भी बोल उठते हैं
जब राष्ट्र की बात छिड़ती है।
मैं उस देश का नाम हूँ
जिसे दुनिया सदियों से भारत कहती है—
और ये नाम सिर्फ़ अक्षर नहीं,
ये एक संस्कार है… एक संकल्प है।

गर्व है मुझे…
कि मैं भारतीय हूँ।

यहाँ सूरज केवल उगता नहीं,
यहाँ सूरज संघर्ष से चमकता है,
यहाँ हवा सिर्फ़ बहती नहीं,
यहाँ हवा में वंदे मातरम् की गूंज बसती है।
यहाँ नदी सिर्फ़ बहती नहीं—
यहाँ गंगा, यमुना, सरस्वती
हमारे भीतर पवित्रता बहाती हैं।

हमारा देश—
मंदिरों की घंटियों की तरह शांत भी है,
और रणभेरी की तरह प्रचंड भी।

भारत…
जहाँ प्रार्थना के साथ पराक्रम चलता है,
जहाँ शांति का अर्थ कमजोरी नहीं,
बल्कि असली शक्ति होता है।
जहाँ नज़र झुकती है
तो किसी के आगे नहीं,
बस माँ-बाप की दुआओं के लिए।

यहाँ किसान की हथेली
धरती का माथा बनाती है,
और सैनिक की छाती
देश की दीवार बन जाती है।
यहाँ हर माँ अपने बेटे को
नायक नहीं—
पहले इंसान बनाती है,
फिर ज़रूरत पड़े तो
शेर बना देती है।

मैं उस देश का नागरिक हूँ
जिसने शून्य दिया,
योग दिया,
वेदों की रोशनी दी,
और विज्ञान की परिभाषा को
आत्मा के अर्थ से जोड़ा।
जहाँ ज्ञान केवल किताबों में नहीं—
संस्कार बनकर
रक्त में बहता है।

यह भारत है।
यहाँ हर घर में एक कहानी है,
हर गली में एक संस्कृति,
हर भाषा में एक संगीत,
और हर दिल में एक राष्ट्र।

हमारी पहचान केवल तिरंगा नहीं,
हमारी पहचान वो ज़िद है
जो हारने के बाद भी उठ खड़ी होती है।
हम वो हैं
जो गिरकर भी मिट्टी को सलाम करते हैं,
और उठकर आसमान को चुनौती देते हैं।

यह देश राख से उठने वाला फीनिक्स है,
यह देश भीड़ में चमकने वाला दीपक है,
यह देश बहते आँसू में छुपी मुस्कान है,
यह देश…
भीख नहीं मांगता, इतिहास बनाता है।

जब दुनिया पूछती है
तुम कौन हो?
तो मैं कहता हूँ—

मैं भारत हूँ।
मैं वो हूँ
जो शांति में बुद्ध बनता है
और अन्याय में
भगत सिंह की आग बन जाता है।
मैं वो हूँ
जो रानी लक्ष्मीबाई की तलवार में,
और चंद्रशेखर की आँखों में
चमक बनकर रहता है।

मैं भारत हूँ…
मैं पराक्रम भी,
मैं प्रेम भी।

हमारे देश की खूबसूरती देखो—
यहाँ धर्म अलग हो सकते हैं
पर धड़कन एक है,
यहाँ भाषाएँ अलग हो सकती हैं
पर मंत्र एक है—
'भारत माता की जय।'

यहाँ त्योहार
केवल तारीख़ें नहीं,
यहाँ त्योहार
दिलों के रिश्तों के पुल हैं।
यहाँ दिवाली की रोशनी
सिर्फ़ दीयों में नहीं,
आँखों के भरोसे में जलती है।

भारत वो देश है
जहाँ गरीबी भी मुस्कुरा देती है,
और संघर्ष भी गाना गा देता है।
जहाँ लोग कम साधनों में
असीम सपने बुनते हैं,
और अपनी मेहनत से
मिट्टी को भी सोना बना देते हैं।

हम भारतीय—
भाग्य पर नहीं,
कर्म पर भरोसा रखते हैं।
हमारे लिए देश
केवल ज़मीन का टुकड़ा नहीं,
देश एक माँ है,
और माँ के लिए
हम सब कुछ बन जाते हैं।

अगर कभी भारत की शक्ति समझनी हो
तो सीमा पर खड़े सैनिक को देखो,
उसके चेहरे की धूल में
देश का सम्मान लिखा मिलेगा।
और अगर भारत की आत्मा समझनी हो
तो खेत में झुके किसान को देखो—
उसकी मेहनत में
राष्ट्र की रोटी पकती है।

गर्व है मुझे
कि मैं उस तिरंगे का रंग हूँ
जो झुकता नहीं,
जो रुकता नहीं,
जो मिटता नहीं।

गर्व है मुझे
कि मेरा जन्म
उस धरती पर हुआ
जिसका नाम आते ही
दिल खड़ा हो जाता है।

और मैं आज भी
सीना चौड़ा करके कहता हूँ—

'गर्व से कहो— हम भारतीय हैं! ' 🇮🇳🔥
'भारत माता की जय! '
'वंदे मातरम्! '
----पुष्प सिरोही

गर्व से कहो — हम भारतीय हैं
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