बदनाम ज़िंदा है Poem by Pushp Sirohi

बदनाम ज़िंदा है

अभी इस दिल में तेरा नाम ज़िंदा है
मेरे हर ख़्वाब में अंजाम ज़िंदा है

वो जो कहते हैं मोहब्बत मर गई
शायद उनका ही हर एहसास ज़िंदा है

बिछड़ के भी ये कहेगा पुष्प
कि इश्क़ आज भी बदनाम ज़िंदा है

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