अब कोई शिकायत नहीं Poem by Pushp Sirohi

अब कोई शिकायत नहीं

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अब न शिकवा है, न कोई गिला
जो था, वही होना था

कुछ लोग सिखाने आते हैं
कि किससे दिल नहीं लगाना था

मैंने भी सब स्वीकार किया
दर्द को अपना बना लिया

सब समझ कर भी चुप है
आज का पुष्प

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