खुदा, उसे मेरी आदत बना दे Poem by Pushp Sirohi

खुदा, उसे मेरी आदत बना दे

कुछ ऐसा कर मेरे मौला,
मेरी ये इल्तिज़ा सुन ले,
उसके दिल की हर धड़कन में
मेरी चाहत का उजाला चुन ले।

उसकी हर सोच की मंज़िल मैं बनूँ,
हर ख़्वाब में मेरी ही तस्वीर आए,
वो जब भी दुनिया से थक जाए
तो मेरी याद उसे सुकून दिलाए।

उसे हर वक़्त बस मेरी ही तलब रहे,
मेरी बातों में उसे करार मिले,
मेरी ख़ामोशी भी वो समझ सके
और मेरी हँसी में उसे प्यार मिले।

ऐसी मोहब्बत उसके दिल में जगा दे,
जो शर्तों से कभी कम न हो,
वक़्त बदले, हालात बदलें
पर उसका दिल मुझसे जुदा न हो।

उसकी प्यास का हासिल मैं बनूँ,
मेरी नज़रों में उसे सुकून आए,
मेरे लफ़्ज़ों में वो अपना घर पाए
और मेरी याद में मुस्कुराए।

बना दे उसे मेरे इश्क़ की मीरा,
जो मेरे गीत ही गुनगुनाए,
दुनिया की भीड़ में खो जाए अगर
तो मेरी ही राहों में लौट आए।

और अगर कभी किस्मत ने
हमारी राहों को जुदा कर दिया,
तो ऐसी दीवानगी उसके दिल में भर दे
कि वो तक़दीर से भी लड़ जाए।

खुदा से भी कह दे वो एक दिन—
"मेरी दुनिया वहीं बसती है",
और सारी दुनिया छोड़ कर
फिर मेरे ही पास चली आए।

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