मुकम्मल वस्ल (मिलन की खुशी) Poem by Pushp Sirohi

मुकम्मल वस्ल (मिलन की खुशी)

कुछ ऐसा कर मेरे मौला,
वो हँसते हुए मेरे पास आए,
चेहरे पर वफ़ा की चमक हो,
और लबों पर मेरा ही नाम सजाए।

मेरी याद की एक ऐसी मीठी
लहर उसके ज़हन में उठा दे,
कि दुनिया की हर उलझन को
वो मुस्कुराहट में उड़ा दे।

उसकी आँखों में वो सुकून हो,
जैसे मंज़िल मिल गई हो उसे,
मेरी बाहों के घेरे में,
सारी कायनात दिख जाए उसे।

वो जो दूर है मुझसे,
उसे लौटने की एक उमंग दे,
मेरी चाहत के रंगों से,
उसका हर लम्हा और अंग दे।

बना दे उसे मेरे इश्क़ की मीरा,
जो झूमती हुई लौट आए,
मेरी रूह की ठंडक बने वो,
और खुशियों के गीत गुनगुनाए।

खुदा! तू खुद गवाह बन जा,
इस खूबसूरत मिलन का,
कि वो खिलखिला कर मिले मुझसे,
और अंत हो हर तड़पन का।

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