सिर्फ़ हौसले बुलंद रख Poem by Pushpa P.

सिर्फ़ हौसले बुलंद रख

सिर्फ़ हौसले बुलंद रख
ना करना तू अहंकार कभी
रख आत्मविश्वास सिर्फ़
और अनुगामी हो केवल ख़ुद के पथ का

ना झुक ना रुक ना डिग
लक्ष्य से अपने तू कभी
साध तीर प्राप्त कर
सफलता की ये रौशनी

लड़े जा अपने भाग्य से
कदम पीछे ना हटा कभी
जुस्तजू जीत की और अगन जला ले फ़तेह की
कर्मठ कर्म को ही तब जाकर मिलती है ये सर जमी

ना डिगने देना बढ़ते तेरे कदम कभी
जीत की राहों में कंटक मिलते है ही
कभी घेर लेती निराशा तो कभी
थकान ला देगी आँखों में नमी

कई कसौटियां कसेंगी कदम तेरे
पर तू रुकना कभी नहीं कभी नहीं
इम्तिहान तो इम्तिहान होते हैं
क्यूँकर आशा रखें तू फूलों की
इन इम्तिहानों में नसीबों के पन्ने भी खुलेंगे कभी ना कभी
और हाँ ईश्वर मेहनत का फल तुझे देंगे जरूर कभी ना कभी
कभी ना कभी

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