डर छोड़,
तू आगे बढ़,
वीरों की यह धरती है।
खा कसम अब लड़ने की,
दुनिया से टकराने की।
अदब कर वीर सेनानी का,
शहीदों की उस जवानी का।
वक्त पड़े तो रण की सुन,
जाके तब तू तिलक लगा।
सोच नहीं,
तू अंजाम दे;
ले अपने भारत का नाम।
यही तुम्हारी वीरता होगी,
यही तुम्हारी गाथा होगी।
कर्म कर,
तू डटकर बढ़;
मन में दृढ़ विश्वास कर।
देश की तू शान है,
माँ भारती की संतान है।
सोच नहीं,
बस कदम बढ़ा,
बलिदानों की यह धरती है।
रुकावट छोड़,
तू आगे बढ़;
जीत तुम्हारी पक्की है।
हर्ष कर,
उल्लास कर,
गर्व से सर ऊँचा कर।
मन में यह विश्वास कर,
जीत तुम्हारी पक्की है।
सोच नहीं,
तू आगे बढ़,
माँ भारती की संतान है।
कर्म कर,
तू निरंतर बढ़;
जीत तुम्हारी पक्की है।
शान कर,
अब गर्व कर;
जीत तुम्हारी पक्की है।
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