आओ आशा के दीप जलाएँ। Poem by Rajnish Rajan

आओ आशा के दीप जलाएँ।

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आओ आशा के दीप जलाएँ,
मिलकर अंधियारा दूर भगाएँ।

ज्ञान की रोशनी को हम,
एक चिंगारी से जलाएँ।

चलो हम निराशा दूर भगाएँ,
सीखने की जिज्ञासा बढ़ाएँ।

है ज्ञान-विज्ञान का सम्मान यहाँ,
लेखनी से ज्योति-अलख जगाएँ,
मिलकर आशा के दीप जलाएँ।

© रजनीश राजन ✍️

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