राम का वकील
प्रस्तुत राम का वकील सुनो।
लेकर आया, कई दलील सुनो।
न्यायाधीश है वह सृष्टि का,
मेरा मगर, मुवक्किल सुनो।
उसे न्याय मिले, सम्मान मिले।
उसका निर्दिष्ट जन्म-स्थान मिले।
जन्म हुआ है इसी धरती पर,
इस तथ्य का पत्रप्रमाण मिले।
जन्म से नागरिकता उसकी,
है युगों से भारत का वासी।
बुरी शक्तियों को मार भगाता,
सहारे उसके साधु, सन्यासी।
राम विरोध में विदेशों के भी
राक्षस हैं जाते हिल मिल, सुनो।
बस एक नर्स की ही गवाही पर,
मिल जाता जन्म प्रमाण पत्र।
करोड़ों भक्त खड़े साक्ष्य में,
राम की नहीं सुनवाई मगर।
उस युग का निगम कहाँ से लाएं!
त्रेता के रजिस्टर कहाँ से लाएं!
बाल्मिकी का ग्रन्थ है प्रस्तुत,
जन्म-पत्री ढूंढ कर कहाँ से लाएं!
चैत्र-नवमी को कौशिल्या की
खिली थी गोदी स्वप्निल, सुनो।
अयोध्या में वो जन्म लिया है।
पूरे भारत का मर्म लिया है।
भक्तों हेतु समर्पित है वह,
जग कल्याण का कर्म लिया है।
नृप दशरथ का पुत्र बड़ा है।
अम्बर, रघुवंशी सूर्य जड़ा है।
अमानवीयता से नित लड़ता,
मर्यादा का एक सूत्र खड़ा है।
उसकी माया से निर्झर बहता,
सुन्दर सरि सरयू सलिल, सुनो।
अरबों की बात अनसुनी हो रही।
लोकतंत्र की कहानी रो रही।
कुछ लोगों का स्वार्थ है भारी,
और उनकी मनमानी हो रही।
उनका कहा पत्थर की लकीर।
समझते राम तक को फ़क़ीर।
समझ रहे उनके ही हाथ की,
कठपुतली भारत की तक़दीर।
जन जन को प्यारा राम का नाम,
कुछ लोगों को क्यों बोझिल, सुनो।
राम-नाम में बड़ी शक्ति समायी।
करोड़ों की इसमें भक्ति समायी।
राम-नाम कितना प्यारा जग में,
जन जन की अनुरक्ति समायी।
करोड़ों जीवन का आधार वही है।
सबके जीने का सार वही है।
आस्था नहीं, है अटल सत्य वह;
करता सब कुछ साकार वही है।
सबके जीवन की यात्रा का,
राम नाम है अंतिम मील, सुनो।
सम्पूर्ण सृष्टि का ईश है वो।
सर्वश्रेष्ठ न्यायाधीश है वो।
समूचा संसार चलाने वाला,
त्रिलोक स्वामी, जगदीश है वो।
उसके पास जब तुम जाओगे।
न्याय पाने का बिगुल बजाओगे।
करनी होयेगी जो भी तुम्हारी,
उसी का तुम प्रतिफल पाओगे।
दोगे कितने भी तर्क वितर्क,
वो ना देगा न्याय में ढील, सुनो।
करता सबका बेड़ा पार है, राम।
अपने भक्तों पर न्यौछार है, राम।
राम का नाम है एक परम शक्ति,
कुछ थोड़ों पर क्यों भार है, राम!
करता जो विरोध, रावण ही होगा।
लाता जो अवरोध, रावण ही होगा।
राक्षसी प्रवृत्तियां वो मार भगाता,
जिसको नहीं बोध, रावण ही होगा।
राम का नाम रखता इतना दम,
घोर पाप भी जाता लील, सुनो।
बुद्ध से पहले भी था राम का नाम।
मुहम्मद नहीं थे, था राम का नाम।
महावीर, जीसस से युगों पहले था।
गुरुनानक ने भजा, राम का नाम।
हिन्दू ना कोई मुसलमान है राम।
सभी धर्मों का धाम है राम।
सृष्टि को रावण से मुक्त कराता,
हर युग में ही, भगवान है राम।
राम का प्रभाव भस्म कर देता,
रावण की हर चाल कुटिल, सुनो।
अम्बर में कहीं अलौकिक रहकर,
देखता दशानन के उत्पातों को।
प्रकट हो जाता है अति होने पर,
काटने को उसके सब घातों को।
निति व आदर्शों का अनुयायी है।
भक्तों की रक्षा का उत्तरदायी है।
बिना पुकारे ही प्रकट हो जाता,
भक्तों पर जब विपदा आयी है।
राम नाम का जो भी जप करते,
उनसे वो रहता स्नेहिल, सुनो।
भजे रघुपति राघव राजा राम,
संविधान में पर ना दिए स्थान।
चलाता है जो सृष्टि का विधान,
उसे डराते दिखाकर संविधान।
वो है 'लॉर्ड्स का लार्ड', मे लार्ड।
आया लेकर दरख्वास्त, मे लार्ड।
होती है जब, कृपा दृष्टि उसकी,
होता तभी लार्ड भी लार्ड, मे लार्ड।
उस 'राम' की जन्म भूमि का न्याय,
करते क्यों हो इतना जटिल, सुनो।
जब चाहेगा, मंदिर बन जायेगा।
राम का काम कौन रोक पायेगा।
राम करेगा जब भी अपने काम,
मर्यादा भी अवश्य निभायेगा।
नर के निर्णय पर वो न निर्भर।
राम हेतु कुछ भी नहीं दुष्कर।
निर्माण का यश भक्तों को मिले,
इस लिए बनाता स्वयं न मंदिर।
मंदिर है बना, राम तो रमता,
हर भारतवासी के दिल, सुनो।
- एस. डी. तिवारी
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