Ramayan Ki Naari सबरी (Hindi) Poem by S.D. TIWARI

Ramayan Ki Naari सबरी (Hindi)

सबरी के घर राम पधारे
हुई दीवानी ख़ुशी के मारे
क्या क्या है घर में रखा, ढूंढे एक एक बर्तन
करने को आवभगत, करती नाना जतन
कूंचा ले घर अंगना बुहारे।
सबरी के घर ...
क्या खिलाऊँ, अपने राम को कैसे रिझाऊं
भाता क्या है मेरे राम को, समझ न पाऊं
बैठ राम का रूप निहारे।
सबरी के घर ...
चुन चुन कर ले लाई, वह बगिया से बेर
चख चख कर परोस दी, करी नहीं अबेर
प्रेम भक्ति से राम हर्षाये।
सबरी के घर ...

एस० डी० तिवारी

Thursday, November 17, 2016
Topic(s) of this poem: epical,hindi
COMMENTS OF THE POEM
Rajnish Manga 19 November 2016

शबरी के मनोभाव का सटीक चित्रण प्रस्तुत किया है कवि में. बहुत बहुत धन्यवाद: क्या खिलाऊँ, अपने राम को कैसे रिझाऊं भाता क्या है मेरे राम को, समझ न पाऊं बैठ राम का रूप निहारे। प्रेम भक्ति से राम हर्षाये। सबरी के घर...

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