सबरी के घर राम पधारे
हुई दीवानी ख़ुशी के मारे
क्या क्या है घर में रखा, ढूंढे एक एक बर्तन
करने को आवभगत, करती नाना जतन
कूंचा ले घर अंगना बुहारे।
सबरी के घर ...
क्या खिलाऊँ, अपने राम को कैसे रिझाऊं
भाता क्या है मेरे राम को, समझ न पाऊं
बैठ राम का रूप निहारे।
सबरी के घर ...
चुन चुन कर ले लाई, वह बगिया से बेर
चख चख कर परोस दी, करी नहीं अबेर
प्रेम भक्ति से राम हर्षाये।
सबरी के घर ...
एस० डी० तिवारी
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शबरी के मनोभाव का सटीक चित्रण प्रस्तुत किया है कवि में. बहुत बहुत धन्यवाद: क्या खिलाऊँ, अपने राम को कैसे रिझाऊं भाता क्या है मेरे राम को, समझ न पाऊं बैठ राम का रूप निहारे। प्रेम भक्ति से राम हर्षाये। सबरी के घर...