Ramayan Ki Naari अनसुईया (Hindi) Poem by S.D. TIWARI

Ramayan Ki Naari अनसुईया (Hindi)

अनसुईया

अनसुईया की सुनो कथा
दक्ष प्रजापति की थी कन्या

अनसुईया के प्रताप को
और उसके सतीत्व का तेज
आकाश मार्ग से जाते भी
अनुभव करते थे सब देव
अत्रि मुनि के आश्रम में
अपनी तपस्या में वो रमे
धर्म मार्ग पर चली सदा

हुआ सीता राम का आगत
अनसुईया ने किया स्वागत
अत्रि आश्रम में साध्वी का वेश
सीता को दिया धर्म उपदेश
धैर्य धर्म मित्र स्त्री चार
संकट कल में परखे जात
समझना सबसे धर्म बड़ा

गए विष्णु महेश व ब्रह्मा
अनसुइया की लेने परीक्षा
निर्वस्त्र होकर देने पर ही
ग्रहण करेंगे हम भिक्षा
पूरी सृष्टि के जो हैं पालक
अनसुईया ने बनाया बालक
अपनी गोद में लिया उठा

एस० डी० तिवारी

Thursday, November 17, 2016
Topic(s) of this poem: epical,hindi
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