Ramayan Ki Naari सूर्पणखा (Hindi) Poem by S.D. TIWARI

Ramayan Ki Naari सूर्पणखा (Hindi)

Rating: 5.0

सूर्पणखा

खुद की करनी, बनी नकटी
कभी राम, कभी लखन
बारी बारी से तंग करती
रिझाने चली प्रभु राम को
बन के सुंदरी वह कपटी
विवाह से मना किया तो
लक्ष्मण ओर वह लपकी
बोले लखन जाओ उधर
आना नहीं इधर अबकी
धर रूप राक्षसी सूर्पणखा
झट सीता पर तब झपटी
लखन ने काट दिया नाक
रोती गयी बन के नकटी
खुद की करनी, बनी नकटी

एस० डी० तिवारी

Saturday, November 19, 2016
Topic(s) of this poem: epical,hindi
COMMENTS OF THE POEM
Rajnish Manga 19 November 2016

खूबसूरत अभिव्यक्ति. रामायण के नारी पात्रों का सुंदर काव्यात्मक विश्लेषण. बहुत अच्छी श्रंखला है.

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